इससे लगता है कि बाइडेन सरकार इस्राईल-फ़िलिस्तीन तनाव को दूर करने के लिए कोई बड़ा क़दम नहीं उठाएगी।
इस बात की संभावना है कि बाइडेन, इस्राईल की ओर से कॉलोनियों के जारी निर्माण पर- जो अवैध और शांति के मार्ग में रुकावट हैं- अमरीका के पहले वाले नज़रिये पर वापस आ जाएं, लेकिन लगता नहीं है कि इस संबंध में वह और ब्लिंकन कुछ करेंगे। वह बहुत करेंगे तो फ़िलिस्तीन में ‘स्टेटस को’ का समर्थन करेंगे, जिसका मतलब होगा इस्राईल बिना किसी रुकावट के फ़िलिस्तीन की अतिग्रहित भूमि को इस्राईल में शामिल करने के टार्गेट को हासिल करने की दिशा में बढ़ता रहे और फ़िलिस्तीनी अपनी ही भूमि पर स्टेटलेसनेस अर्थात राष्ट्रीयताहीनता का शिकार रहें।
बाइडेन प्रशासन की ओर से अरब राष्ट्रों के साथ इस्राईल के संबंध सामान्य बनाने की प्रक्रिया का समर्थन होने की संभावना है जो ट्रम्प के शासन में उनके दामाद की ओर से शुरू की गयी, लेकिन इस बात के मद्देनज़र कि कुश्नर ने अपनी यह कोशिश सऊदी अरब और यूएई के निकट सहयोग से आगे बढ़ाई, इसलिए संबंध सामान्य बनाने की प्रक्रिया की रफ़्तार धीमी हो सकती है, क्योंकि सऊदी अरब और यूएई के साथ अमरीका के संबंध का दायरा छोटा हो सकता है। इसकी एक वजह यह है कि बाइडेन ईरान के साथ परमाणु समझौते में लौटने का पहले ही एलान कर चुके हैं।